बार-बार नियम बदलने से दिक्कत में GST सुविधा प्रोवाइडर

  • Posted on: 25 September 2017
  • By: admin
नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर के आइटी तंत्र जीएसटीएन में तकनीकी खामियों से न सिर्फ आम कारोबारियों को दिक्कत हो रही है, बल्कि जीएसटी सुविधा प्रोवाइडर को भी कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के संबंध में बार-बार समयसीमा में फेरबदल के चलते इन्हें खासी दिक्कत आ रही है।
जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी ईजमायजीएसटी के सह-संस्थापक आशीष मित्तल ने कहा कि जीएसटी नेटवर्क पर सबमिट और फाइल विकल्प भी सुचारु ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। साथ ही करदाताओं में एचएसएन कोड के इस्तेमाल करने को लेकर भी भ्रम है। एचएसएन चार डिजिट का इस्तेमाल करना है या आठ डिजिट का यह स्थिति स्पष्ट नहीं है। जीएसटी के बारे में अगर कोई सवाल होता है तो उसका जवाब भी काफी देर से मिलता है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि जीएसटीएन का डाउनटाइम काफी अधिक है। हालांकि सरकार की दलील है कि अधिकतर करदाता रिटर्न दाखिल करने के लिए आखिरी तिथि का इंतजार करते हैं। इसके चलते जीएसटीएन पर अंतिम दिन बोझ पड़ जाता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जीएसटी नेटवर्क पर एक घंटे में एक साथ एक लाख रिटर्न दाखिल किए जा सकते हैं। इस तरह एक दिन में अधिकतम 24 लाख रिटर्न ही दाखिल हो सकते हैं। हालांकि अधिकांश लोग जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के लिए अंतिम तारीख का ही इंतजार करते हैं। जीएसटी काउंसिल की नौ सितंबर को हैदराबाद में हुई बैठक में राज्यों ने जीएसटीएन में तकनीकी खामियों का मुद्दा उठाया था। इसके बाद काउंसिल ने इनका हल निकालने को मंत्रिसमूह गठित करने का फैसला किया था। यह समूह बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी की अध्यक्षता में बनाया गया।
 
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