बहुरंगी संस्कृति से ही राजस्थान की अलग पहचान: डॉ. बी. डी. कल्ला

  • Posted on: 10 March 2020
  • By: admin
जयपुर। कला, साहित्य और संस्कृति मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने कहा है कि बहुरंगी सांस्कृतिक विरासत के कारण राजस्थान की देश और विदेश में विशिष्ट पहचान है। उन्होंने प्रदेश की लोक संस्कृति, परम्पराओं को अक्षुण्ण रखने और राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के लिए सभी से मिलकर योगदान देने की अपील करते हुए कहा कि संस्कृति से ही हमारी पहचान है, संस्कृति जिंदा है, तब ही हम जिंदा है। 
डॉ. कल्ला जयुपर के बिड़ला आडिटोरियम में शेखावाटी विकास परिषद एवं ट्रस्ट की ओर से आयोजित फाग उत्सव को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। कला, साहित्य और संस्कृति मंत्री ने कहा कि होली की समृद्ध परम्पराओं को कायम रखने में शेखावाटी अंचल और बीकानेर का बड़ा योगदान है। शेखावाटी की होली के अलावा बीकानेर के अलग-अलग मौहल्लों में इन दिनों चल रही रम्मतें प्रदेश की लोक संस्कृति और परम्पराओं को अक्षुण्ण बनाए हुए है। डॉ. कल्ला ने कहा कि राजस्थानी पूरे विश्व में एक ऐसी अनूठी भाषा है, जिसमें Óप्रथम पुरुषÓ को नाम लेकर पुकारे जाने से ही व्यक्तियों के बीच में सम्बंध का पता लगाया जा सकता है। हमारी मायड़ भाषा राजस्थानी में प्रत्येक महिने के अलग-अगल गीत है, जो लोक संस्कृति के रंगों में रंगे में रंगे हुए हैं। इन गीतों से ही यह सहज रूप से पता चल जाता है कि कौनसा महिना चल रहा है। डॉ. कल्ला ने अलगअलग महिनों से जुड़े हुए राजस्थानी लोक संस्कृति के गीतों की चर्चा करते हुए कहा कि फाल्गुन का महिना आते ही डफ और चंग की धमाल के सुर प्रदेश की फिजाओं में गूंजने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा को मान्यता देने के लिए राज्य विधानसभा की ओर से प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भिजवाए हुए काफी अरसा हो गया है। केन्द्र सरकार हमारी मायड़ भाषा को आठवलृ अनुसूची में शामिल कर मान्यता प्रदान करे, इसके लिए सभी मिलकर प्रयास करें।
 
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