तेल- तिलहन बाजार पशोपेश में फंसा, विदेशों में भाव ऊंचे जबकि कमी के बावजूद घरेलू बाजार नीचे

  • Posted on: 25 February 2020
  • By: admin
नयी दिल्ली। देश में खाद्य तेल- तिलहन बाजार इन दिनों अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। खाद्य तेलों की कमी और आयात पर भारी निर्भरता के बावजूद इस समय स्थानीय तेल तिलहन बाजार टूटा हुआ है जबकि कुछ महीने से विदेशों में भाव ऊंचे चल रहे थे। इस स्थिति से आयातक और कारोबारी पशोपेश में हैं। उनका कहना है कि स्थानीय वायदाकारोबार में तेल तिलहन के भाव टूटे हुए हैं।
तेल उद्योग का कहना है कि सरकार को तुरंत स्थति का संज्ञान लेना चाहिये क्योंकि यह स्थति घरेलू तिलहन किसानों के हित में भी नहीं है।तेल उद्योग के सूत्रों का कहना है कि तेल का घरेलू उत्पादन जरूरत से 70 प्रतिशत तक रहता है। इस कारण विदेशों से कच्चे पाम आयल और सोयाबीन डीगम तेल का भारी मात्रा में आयात किया जाता है। पॉम तेल के सबसे बड़े उत्पादक देश मलेशिया और इंडोनेशिया में तेल इस समय भाव 650 डालर प्रति टन से ऊंचा बोला जा रहा है। भारत में आरबीडी पॉमोलीन की पहुंच लागत करीब 720 डालर प्रति टन के आसपास पड़ती है। रुपये में यह 8,100 रुपये क्विंटल तक पड़ता है जबकि घरेलू बाजार में पामोलिन का भाव 7,500 रुपये क्विंटल चल रहा है। इस प्रकार आयातकों के लिये कारोबार में बने रहना संकट वाली स्थिति बन गई है। यही हाल सोयाबीन डीगम तेल का है। विदेशों में सोयाबीन डीगम का भाव 795 डालर प्रति टन तक है। 
 
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