तकनीक के दर्द

  • Posted on: 25 June 2019
  • By: admin

ज्ञान-विज्ञान की बहुत सारी शाखाएं दो चीजों को जानने-समझने में सबसे ज्यादा उलझी रहती हैं। एक तो यह कि इंसान का भविष्य कैसा होगा? और दूसरे यह कि भविष्य का इंसान कैसा होगा? पहली नजर में देखने पर ये दोनों एक तरह की दो बातें लग सकती हैं, लेकिन एक अलग स्तर पर ये दोनों बिल्कुल ही अलग-अलग किस्म की बातें भी हैं। शायद इसलिए भी कि इन दोनों का अध्ययन करने वाले विज्ञान की शाखाएं भी अलग-अलग हैं।
लेकिन इन दोनों ही तरह के अध्ययन करने वाले एक बात पर सहमत हैं कि इन दोनों चीजों को तय करने में वह तकनीक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है, जिसे खुद हमने ही विकसित किया है। यही होता भी रहा है, लेकिन भविष्य के इंसान के बारे में अब जो नई चीजें सामने आ रही हैं, वे चौंकाने वाली हैं। ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के चिकित्साशास्त्रियों ने 2016 में 218 नौजवानों के सिर और गरदन के एक्स-रे का अध्ययन किया, तो वे चौंक गए। उन्होंने पाया कि उसमें से 21 फीसदी लोगों के पीछे की ओर, सिर के नीचे गरदन के पास एक हड्डी उभर रही है। इस पर किसी नतीजे पर पहुंचने की बजाय वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन को जारी रखने का फैसला किया। अब वे इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि हम जो दिन भर काफी समय तक सिर झुकाकर मोबाइल देखते रहते हैं, यह हड्डी हमारी उसी आदत से विकसित होती जा रही है। फिलहाल तो इसकी वजह से लोगों में कंधे और गरदन में दर्द की समस्याएं उभर रही हैं, लेकिन यह मामला किधर जाएगा, अभी कहा नहीं जा सकता। एक आशंका यह है कि अगर ऐसे ही हड्डी का उभरना जारी रहा, तो सींग जैसी कोई रचना इंसान के शरीर में उभर सकती है। हालांकि ऐसा शायद बहुत अति होने पर ही होगा। वैसे तकनीक के कारण इंसान के जीवन में बदलाव कोई नई चीज नहीं है। जैसे यह माना जाता है कि अनिद्रा की समस्या तब शुरू हुई, जब इंसान ने विद्युत बल्ब या कृत्रिम प्रकाश का इस्तेमाल शुरू किया। इसी तरह, मोटर गाडिय़ों और मिलों-फैक्टरियों के धुएं ने हमारे दिल, फेफड़े वगैरह को कई तरह की समस्याएं दीं। लेकिन यह पहली बार ही हुआ है, जब तकनीक की वजह से इंसान की शरीर रचना में कोई बहुत बड़ा बदलाव होता दिख रहा है। स्मार्टफोन तकनीक का कोई बड़ा असर दिखेगा, यह काफी समय से माना जा रहा था, लेकिन चीजें यह रूप लेंगी, इसे सोचा नहीं जा सका था। इसका इलाज क्या है? हम स्मार्टफोन का इस्तेमाल कुछ हद तक कम कर सकते हैं, लेकिन शायद इसे पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। तकनीक में तुरंत बड़े बदलाव की संभावना भी नहीं है, डर यह भी है कि नई तकनीक खुद अपनी नई समस्याएं लेकर आ सकती है।

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