टॉवरों से कमाई के लिए बीएसएनएल बनाएगी एक अलग कंपनी

  • Posted on: 25 September 2017
  • By: admin
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) का टॉवर कारोबार अब अलग कंपनी संभालेगी। नई कंपनी पर बीएसएनएल का पूर्ण स्वामित्व रहेगा। संचार मंत्रालय के इस आशय के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। यह कदम बीएसएनएल के विशालकाय टॉवर इंफ्रास्ट्रक्चर को राजस्व के नए स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने की मंशा से उठाया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इसका फैसला हुआ। फिलहाल देश में कुल मिलाकर 4,42,000 मोबाइल टॉवर हैं। इनमें से 66,000 से ज्यादा टावर बीएसएनएल के हैं। अलग कंपनी पूरी तरह से टॉवर कारोबार को संभालेगी। बीएसएनएल पूरी तरह संचार सेवाओं पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेगी।
मोबाइल टॉवर किसी भी टेलीकॉम ऑपरेटर के लिए सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति हैं। कंपनियां अपने अलावा दूसरी ऑपरेटरों को भी किराये पर देकर इन टॉवरों से अतिरिक्त राजस्व कमा सकती हैं।
बीएसएनएल का टॉवर नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है। इनमें दूरदराज के ऐसे इलाके शामिल हैं, जहां निजी कंपनियों की पहुंच नहीं है। ऐसे में निजी कंपनियों को अपने टॉवर किराये पर उपलब्ध कराकर बीएसएनएल अच्छी कमाई कर सकती है। नई कंपनी यही काम करेगी।
टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के साझा इस्तेमाल के जरिये निवेश और लागत में कमी के लिए दुनिया भर में टेलीकॉम टावर कारोबार एक स्वतंत्र उद्योग का रूप ले रहा है। दूरसंचार विभाग की नीति टावरों, डीजल जनरेटर सेट, बैटरी यूनिट, पावर इंटरफेस यूनिट, एयर कंडीशनिंग यूनिट जैसे पैसिव इन्फ्रास्ट्रक्चर के साझा इस्तेमाल की अनुमति देती है। इससे टेलीकॉम उद्योग के विकास को बढ़ावा मिला है। टावर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी की संपत्तियों में उपरोक्त सभी चीजें आती हैं, जिन्हें पट्टे या किराये पर उठाकर अतिरिक्त राजस्व प्राप्त किया जा सकता है। इससे एक ही इलाके में विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों को अपना अलग पैसिव इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की जरूरत नहीं पड़ती। सार्वजनिक क्षेत्र की अपने खुद के पैसिव इंफ्रास्ट्रक्चर वाली बीएसएनएल और एमटीएनएल जैसी टेलीकॉम कंपनियों के लिए टॉवर व्यवसाय से कमाई करने के कई बिजनेस मॉडल उपलब्ध हैं।
मसलन, ऐसी अलग कंपनी बनाकर जिसमें नई कंपनी का पूर्ण स्वामित्व मूल कंपनी के पास रहता है। ऐसी अलग कंपनी बनाकर जिसमें नई कंपनी को एकदम स्वतंत्र यूनिट के तौर पर स्थापित किया जाता है। इसमें मूल कंपनी उसके टॉवर इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल लीज या किराये पर करती है।
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